नैरोबी, 22 सितम्बर (शिन्हुआ) - केन्या के वैज्ञानिकों ने आलू की ऐसी किस्में विकसित की हैं जो सिस्ट निमेटोड के प्रति प्रतिरोधी हैं। इससे देश और पूरे अफ्रीका में आलू की फसल की किस्मत बदलने की उम्मीद है।

आलू सिस्ट निमेटोड्स (पीसीएन) छोटे कृमि जैसे कीट हैं जो पौधे की जड़ों के साथ-साथ टमाटर और बैंगन को भी खाते हैं, जिससे गंभीर क्षति होती है, जिसके कारण पूरे महाद्वीप में सैकड़ों किसान फसल लेने से वंचित रह जाते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय उष्णकटिबंधीय कृषि संस्थान (आईआईटीए) और अंतर्राष्ट्रीय कीट फिजियोलॉजी एवं पारिस्थितिकी केंद्र (आईसीआईपीई) के वैज्ञानिकों ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि पीसीएन के प्रति प्रतिरोधकता के अलावा, नई किस्में शीघ्र पकने वाली हैं।

आईआईटीए में मृदा के प्रोफेसर डैनी कोयने ने कहा, "हमने ऐसी किस्में विकसित की हैं जो शीघ्र पकने वाली हैं तथा कम समय तक निष्क्रिय रहती हैं, जो वर्तमान में किसानों द्वारा उगाई जा रही सर्वाधिक लोकप्रिय किस्मों की प्रमुख विशेषताएं हैं, साथ ही वर्तमान स्थानीय किस्मों की तुलना में इनकी उपज भी अधिक है।"

आईसीआईपीई के सूत्रकृमिविज्ञानी सोल्वेग हॉकलैंड ने कहा कि एक नई किस्म की पहचान, जो पीसीएन के प्रति प्रतिरोधी है, शीघ्र पकने वाली है तथा अच्छी उपज देती है, बाजार में अत्यधिक प्रतिष्ठित है तथा महाद्वीप में आलू किसानों की किस्मत बदल देगी।

केन्या प्लांट हेल्थ इंस्पेक्टरेट सर्विस के प्लांट हेल्थ इंस्पेक्टर जॉर्ज न्गुंडो ने कहा कि नई पीसीएन प्रतिरोधी किस्मों की शुरूआत आलू किसानों पर आने वाले संकट से लड़ने की दिशा में एक स्वागत योग्य कदम है।

उन्होंने कहा, "ये किस्में केन्या में अपनी तरह की पहली किस्में हैं, क्योंकि देश में बीज प्रणाली में पीसीएन प्रतिरोधी किस्में नहीं हैं।"

स्रोत: xinhuanet.com